$20\, \Omega$ प्रतिरोध और $5\, H$ प्रेरकत्व वाली एक कुंडली को $100\, V$ की बैटरी से जोड़ा गया है। कुंडली में संचित ऊर्जा .... $J$ होगी।

  • A
    $41.5$
  • B
    $62.50$
  • C
    $125$
  • D
    $250$

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$4 A$ की धारा वहन करने वाले $50 mH$ के प्रेरक (inductor) में संचित ऊर्जा है ($J$ में)

कथन : यदि किसी परिनालिका (solenoid) में धारा की दिशा को परिमाण समान रखते हुए उलट दिया जाए,तो परिनालिका में संचित चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है।
कारण : चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा घनत्व चुंबकीय क्षेत्र के समानुपाती होता है।

$(a)$ सोलेनोइड में संचित चुंबकीय ऊर्जा के लिए व्यंजक चुंबकीय क्षेत्र $B$,क्षेत्रफल $A$ और लंबाई $l$ के पदों में प्राप्त कीजिए।
$(b)$ इस चुंबकीय ऊर्जा की तुलना संधारित्र (capacitor) में संचित स्थिर-वैद्युत ऊर्जा से कैसे की जा सकती है?

यदि एक प्रेरक (inductor) से प्रवाहित धारा $2 \ A$ से बढ़कर $3 \ A$ हो जाती है,तो प्रेरक में संचित चुंबकीय ऊर्जा में कितनी वृद्धि होगी ($\%$ में)?

$40 \, mH$ के स्व-प्रेरकत्व वाली और $2 \, A$ की स्थिर धारा वहन करने वाली कुंडली (coil) में संचित ऊर्जा ..... $J$ है।

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