कथन : यदि किसी परिनालिका (solenoid) में धारा की दिशा को परिमाण समान रखते हुए उलट दिया जाए,तो परिनालिका में संचित चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है।
कारण : चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा घनत्व चुंबकीय क्षेत्र के समानुपाती होता है।

  • A
    यदि कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण,कथन की सही व्याख्या है।
  • B
    यदि कथन और कारण दोनों सही हैं,लेकिन कारण,कथन की सही व्याख्या नहीं है।
  • C
    यदि कथन सही है लेकिन कारण गलत है।
  • D
    यदि कथन और कारण दोनों गलत हैं।

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चुंबकीय क्षेत्र के संदर्भ में एक परिनालिका (solenoid) में संग्रहीत प्रति इकाई आयतन चुंबकीय ऊर्जा के लिए व्यंजक . . . . . . है।

यदि एक $LR$ परिपथ में धारा को आधा कर दिया जाए,तो उसमें संचित ऊर्जा कितनी होगी?

$L = 200 \ mH$ के स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) वाली कुंडली (coil) में $4 \ A$ की धारा स्थापित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा . . . . . . है। ($J$ में)

$2\,H$ प्रेरकत्व (inductance) वाली एक कुंडली से $2\,A$ की धारा $4\,A/s$ की दर से बढ़ रही है। प्रेरक में प्रति इकाई समय में संचित ऊर्जा ... $J/s$ है।

जब एक कुंडली (coil) से धारा $I$ प्रवाहित होती है,तो इसमें $E_1$ ऊर्जा संचित होती है। अब यदि धारा को घटाकर $I/2$ कर दिया जाए,तो कुंडली में संचित ऊर्जा $E_2$ हो जाती है। ऊर्जा में परिवर्तन क्या है?

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