(N/A) दिया है: $\Delta ABC$ में,$\angle C = 90^\circ$ और $M$,$AB$ का मध्य-बिंदु है $(AM = BM)$। $CM$ को $D$ तक इस प्रकार बढ़ाया गया है कि $DM = CM$ है।
$(i)$ $\Delta AMC$ और $\Delta BMD$ में:
$AM = BM$ (दिया है,$M$,$AB$ का मध्य-बिंदु है)
$\angle AMC = \angle BMD$ (शीर्षाभिमुख कोण)
$CM = DM$ (दिया है)
अतः,$SAS$ सर्वांगसमता कसौटी द्वारा,$\Delta AMC \cong \Delta BMD$ है।
$(ii)$ चूँकि $\Delta AMC \cong \Delta BMD$,इसलिए उनके संगत भाग बराबर हैं $(c.p.c.t.)$।
अतः,$\angle MAC = \angle MBD$। ये एकांतर अंतःकोण हैं,जो यह दर्शाता है कि $AC \parallel DB$ है।
चूँकि $AC \parallel DB$ और $BC$ एक तिर्यक रेखा है,इसलिए क्रमागत अंतःकोणों का योग $180^\circ$ होता है।
$\angle ACB + \angle DBC = 180^\circ$
$90^\circ + \angle DBC = 180^\circ$
$\angle DBC = 180^\circ - 90^\circ = 90^\circ$।
$(iii)$ $\Delta DBC$ और $\Delta ACB$ में:
$DB = AC$ ($\Delta AMC \cong \Delta BMD$ से $c.p.c.t.$)
$\angle DBC = \angle ACB = 90^\circ$ (ऊपर सिद्ध किया गया)
$BC = CB$ (उभयनिष्ठ भुजा)
अतः,$SAS$ सर्वांगसमता कसौटी द्वारा,$\Delta DBC \cong \Delta ACB$ है।
$(iv)$ चूँकि $\Delta DBC \cong \Delta ACB$,इसलिए उनके संगत भाग बराबर हैं $(c.p.c.t.)$।
अतः,$DC = AB$ है।
चूँकि $DM = CM$,इसलिए $CM = \frac{1}{2} DC$ है।
$DC = AB$ प्रतिस्थापित करने पर,हमें $CM = \frac{1}{2} AB$ प्राप्त होता है।