(N/A) $1$. पृथ्वी के अंदर $(r < R_E)$: केंद्र से $r$ दूरी पर गुरुत्वीय त्वरण $g(r) = \frac{4}{3} \pi G \rho r$ द्वारा दिया जाता है,जहाँ $\rho$ पृथ्वी का घनत्व है। चूँकि $\frac{4}{3} \pi G \rho$ स्थिरांक है,इसलिए $g(r) \propto r$ होता है। इसका अर्थ है कि पृथ्वी के केंद्र से सतह की ओर जाने पर $g$ रैखिक रूप से बढ़ता है।
$2$. पृथ्वी के बाहर $(r > R_E)$: केंद्र से $r$ दूरी पर गुरुत्वीय त्वरण $g(r) = \frac{GM}{r^2}$ द्वारा दिया जाता है। अतः,$g(r) \propto \frac{1}{r^2}$ होता है। इसका अर्थ है कि केंद्र से दूरी बढ़ने पर $g$ दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती घटता है।
$3$. सतह पर $(r = R_E)$: $g$ का मान अधिकतम होता है,जो $g = \frac{GM}{R_E^2}$ है।
ग्राफ y-अक्ष पर $g(r)$ और x-अक्ष पर $r$ को दर्शाता है,जो पृथ्वी के अंदर रैखिक वृद्धि और पृथ्वी के बाहर व्युत्क्रम-वर्ग नियम के अनुसार कमी को प्रदर्शित करता है।