(N/A) मान लीजिए कि एक कण $O$ केंद्र और $A$ त्रिज्या वाले वृत्तीय पथ पर अचर कोणीय चाल $\omega$ से वामावर्त (anti-clockwise) दिशा में गति कर रहा है। समय $t$ पर कण $P$ स्थिति पर है और इसकी कला $\theta = \omega t + \phi$ है,जहाँ $\phi$ प्रारंभिक कला है।
$1$. विस्थापन: $X$-अक्ष पर स्थिति सदिश $\vec{OP}$ का प्रक्षेप $x(t) = A \cos(\omega t + \phi)$ है।
$2$. वेग: वृत्तीय गति में कण का वेग $v = A\omega$ है जो स्पर्शरेखीय दिशा में होता है। इस वेग सदिश का $X$-अक्ष पर प्रक्षेप सरल आवर्त गति $(SHM)$ का वेग देता है:
$v(t) = \frac{dx}{dt} = -A\omega \sin(\omega t + \phi)$.
$3$. त्वरण: वृत्तीय गति में कण का अभिकेंद्र त्वरण $a_c = A\omega^2$ है जो केंद्र $O$ की ओर होता है। इस त्वरण सदिश का $X$-अक्ष पर प्रक्षेप $SHM$ का त्वरण देता है:
$a(t) = \frac{dv}{dt} = -A\omega^2 \cos(\omega t + \phi) = -\omega^2 x(t)$.
यह पुष्टि करता है कि यह गति सरल आवर्त गति है।