(N/A) मान लीजिए कि लट्ठे को $y$ विस्थापन से नीचे की ओर दबाया जाता है। लट्ठे द्वारा विस्थापित अतिरिक्त द्रव का आयतन $V_{disp} = A \times y$ होगा।
इस अतिरिक्त विस्थापित आयतन के कारण लट्ठे पर लगने वाला अतिरिक्त उत्प्लावन बल $F_b$ विस्थापित द्रव के भार के बराबर होता है:
$F_b = V_{disp} \times \rho \times g = (A \times y) \times \rho \times g = (A \rho g) y$.
चूंकि यह उत्प्लावन बल विस्थापन $y$ की विपरीत दिशा में कार्य करता है,इसलिए प्रत्यानयन बल $F$ होगा:
$F = - (A \rho g) y$.
यह समीकरण $F = -ky$ के रूप में है,जहाँ $k = A \rho g$ प्रभावी बल नियतांक है।
चूंकि प्रत्यानयन बल विस्थापन के सीधे आनुपातिक है और संतुलन स्थिति की ओर निर्देशित है,इसलिए लट्ठे की गति सरल आवर्त गति $(SHM)$ है।
$SHM$ का आवर्तकाल $T$ इस प्रकार दिया जाता है:
$T = 2\pi \sqrt{\frac{m}{k}}$.
सूत्र में $k = A \rho g$ रखने पर:
$T = 2\pi \sqrt{\frac{m}{A \rho g}}$.
इस प्रकार,यह सिद्ध होता है कि लट्ठा दिए गए आवर्तकाल के साथ $SHM$ करता है।