(N/A) $(i)$ ओम का नियम।
यह नियम बताता है कि,यदि भौतिक स्थितियाँ समान रहें,तो किसी चालक से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा उसके सिरों के बीच विभवांतर के सीधे समानुपाती होती है।
गणितीय रूप में,$V \propto I$ या $V = IR$,जहाँ $R$ चालक का प्रतिरोध है।
$(ii)$ $V-I$ ग्राफ मूल बिंदु से गुजरने वाली एक सीधी रेखा है। यह नियम को सिद्ध करता है क्योंकि एक सीधी रेखा का ग्राफ दर्शाता है कि विभवांतर $V$,विद्युत धारा $I$ के सीधे समानुपाती है $(V \propto I)$।
$(iii)$ $(a)$ परिवर्ती प्रतिरोधक (रियोस्टेट): इसका उपयोग परिपथ में प्रतिरोध को बदलकर विद्युत धारा को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
$(b)$ बंद कुंजी (स्विच): यह परिपथ को पूरा करके विद्युत धारा को प्रवाहित होने देता है।