(N/A) कोणीय संवेग संरक्षण का नियम: यदि किसी निकाय पर कार्य करने वाला कुल बाह्य बल आघूर्ण (torque) शून्य है,तो निकाय का कुल कोणीय संवेग नियत रहता है।
गणितीय व्युत्पत्ति:
एक निश्चित अक्ष के परितः घूर्णन गति के लिए कोणीय संवेग $\overrightarrow{L} = I \vec{\omega}$ द्वारा दिया जाता है।
समय $t$ के सापेक्ष दोनों पक्षों का अवकलन करने पर:
$\frac{d \overrightarrow{L}}{d t} = I \frac{d \vec{\omega}}{d t} = I \vec{\alpha} = \vec{\tau}$.
यदि बाह्य बल आघूर्ण $\vec{\tau} = 0$ है,तो $\frac{d \overrightarrow{L}}{d t} = 0$,जिसका अर्थ है कि $\overrightarrow{L} = \text{नियत}$.
उदाहरण:
मान लीजिए एक लड़की घूमने वाली कुर्सी पर बैठी है और उसने अपने हाथ फैला रखे हैं। उसका जड़त्व आघूर्ण $I_1$ है और कोणीय वेग $\omega_1$ है। जब वह अपने हाथों को अंदर की ओर खींचती है,तो उसका जड़त्व आघूर्ण घटकर $I_2$ हो जाता है (जहाँ $I_2 < I_1$)। चूंकि बाह्य बल आघूर्ण शून्य है,इसलिए कोणीय संवेग संरक्षित रहता है: $I_1 \omega_1 = I_2 \omega_2$। चूँकि $I_2 < I_1$,इसलिए $\omega_2 > \omega_1$ होता है। इस प्रकार,जब लड़की अपने हाथ सिकोड़ती है तो उसका कोणीय वेग बढ़ जाता है।