(N/A) वुल्फ-किशनर अपचयन एक रासायनिक अभिक्रिया है जिसका उपयोग एल्डिहाइड और कीटोन के कार्बोनिल समूह को $CH_{2}$ समूह में अपचयित करने के लिए किया जाता है।
अभिक्रिया और क्रियाविधि:
$1$. एल्डिहाइड या कीटोन को पहले हाइड्राजीन $(NH_{2}NH_{2})$ के साथ उपचारित करके हाइड्राजोन मध्यवर्ती बनाया जाता है,जिसमें जल का एक अणु $(H_{2}O)$ बाहर निकलता है।
$2$. इसके बाद हाइड्राजोन को पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड $(KOH)$ जैसे प्रबल क्षार के साथ एथिलीन ग्लाइकॉल जैसे उच्च क्वथनांक वाले विलायक में गर्म $(453-473 \ K)$ किया जाता है।
$3$. इस प्रक्रिया में नाइट्रोजन गैस $(N_{2})$ निकलती है और संगत हाइड्रोकार्बन प्राप्त होता है।
सामान्य अभिक्रिया:
$>C=O + NH_{2}-NH_{2}$ $\xrightarrow{-H_{2}O} >C=N-NH_{2}$ $\xrightarrow{KOH, \Delta, \text{ethylene glycol}} >CH_{2} + N_{2}$
उदाहरण $1$: एसेटाल्डिहाइड का इथेन में अपचयन
$CH_{3}CHO + NH_{2}NH_{2}$ $\rightarrow CH_{3}CH=NNH_{2}$ $\xrightarrow{KOH, \text{glycol}, \Delta} CH_{3}CH_{3} + N_{2}$
उदाहरण $2$: एसीटोन का प्रोपेन में अपचयन
$(CH_{3})_{2}CO + NH_{2}NH_{2}$ $\rightarrow (CH_{3})_{2}C=NNH_{2}$ $\xrightarrow{KOH, \text{glycol}, \Delta} CH_{3}CH_{2}CH_{3} + N_{2}$