(N/A) प्रेरक प्रभाव कार्बन श्रृंखला से जुड़े परमाणुओं या समूहों की विद्युत ऋणात्मकता में अंतर के कारण कार्बन श्रृंखला के साथ सहसंयोजक बंध के इलेक्ट्रॉन युग्मों का स्थायी विस्थापन है।
इसे दो प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है:
$1$. ऋणात्मक प्रेरक प्रभाव ($-I$ प्रभाव): जब कार्बन श्रृंखला से जुड़ा कोई परमाणु या समूह कार्बन से अधिक विद्युत ऋणात्मक होता है,तो वह साझा इलेक्ट्रॉन युग्म को अपनी ओर आकर्षित करता है। उदाहरणों में $-NO_2$,$-CN$,$-COOH$,$-F$,$-Cl$,$-Br$ और $-I$ शामिल हैं।
$2$. धनात्मक प्रेरक प्रभाव ($+I$ प्रभाव): जब कार्बन श्रृंखला से जुड़ा कोई परमाणु या समूह कार्बन की तुलना में कम विद्युत ऋणात्मक (या इलेक्ट्रॉन दाता) होता है,तो वह इलेक्ट्रॉन घनत्व को खुद से दूर कार्बन श्रृंखला की ओर धकेलता है। उदाहरणों में $-CH_3$,$-C_2H_5$ और $-CH(CH_3)_2$ जैसे एल्काइल समूह शामिल हैं।