जब किसी कुंडली (coil) की लंबाई में बिना किसी परिवर्तन के उसमें फेरों (turns) की संख्या को दोगुना कर दिया जाता है,तो उसका स्व-प्रेरकत्व (self-inductance)

  • A
    $4$ गुना हो जाता है।
  • B
    $2$ गुना हो जाता है।
  • C
    आधा हो जाता है।
  • D
    अपरिवर्तित रहता है।

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Similar Questions

स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) के संबंध में:
$A:$ कुंडली का स्व-प्रेरकत्व उसकी ज्यामिति पर निर्भर करता है।
$B:$ स्व-प्रेरकत्व माध्यम की पारगम्यता (permeability) पर निर्भर नहीं करता है।
$C:$ स्व-प्रेरित e.m.f. परिपथ में धारा के किसी भी परिवर्तन का विरोध करता है।
$D:$ स्व-प्रेरकत्व यांत्रिकी में द्रव्यमान का विद्युत-चुंबकीय अनुरूप है।
$E:$ धारा स्थापित करने के लिए स्व-प्रेरित e.m.f. के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:

एक कुंडली को आयताकार अनुप्रस्थ काट वाले ट्रांसफार्मर के रूप में लपेटा गया है। यदि ट्रांसफार्मर के सभी रैखिक आयामों को $2$ के गुणक से बढ़ा दिया जाए और कुंडली की प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या समान रहे,तो स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) कितने गुणक से बढ़ जाएगा?

एक परिपथ में धारा $0.1 \, s$ में $5.0 \, A$ से घटकर $0.0 \, A$ हो जाती है। यदि $200 \, V$ का औसत $emf$ प्रेरित होता है,तो परिपथ के स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) का अनुमान $H$ में ज्ञात कीजिए।

$400$ फेरों वाली एक लंबी परिनालिका की वाइंडिंग से $0.5 \ A$ की धारा प्रवाहित की जाती है। प्रत्येक फेरे से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स $3 \times 10^{-3} \ Wb$ है। परिनालिका का स्वप्रेरकत्व क्या है ($H$ में)?

जब एक परिनालिका (solenoid) की लंबाई में बिना किसी परिवर्तन के उसमें फेरों (turns) की संख्या दोगुनी कर दी जाती है,तो उसका स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) हो जाता है

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