(N/A) सरल लोलक: एक छोटी भारी वस्तु (गोलक) जो एक हल्की,अवितान्य और लचीली डोरी द्वारा एक स्थिर (दृढ़) आधार से लटकी होती है,उसे सरल लोलक कहा जाता है।
सरल लोलक का संपूर्ण द्रव्यमान लटके हुए गोलक के गुरुत्व केंद्र पर केंद्रित माना जाता है।
निलंबन बिंदु से गोलक के द्रव्यमान केंद्र तक की दूरी को लोलक की लंबाई $(L)$ कहा जाता है।
आवर्तकाल $(T)$ के लिए व्यंजक की व्युत्पत्ति:
मान लीजिए कि $m$ द्रव्यमान का एक छोटा गोलक $L$ लंबाई की अवितान्य,द्रव्यमानहीन डोरी से बंधा है।
डोरी का दूसरा सिरा एक आधार से जुड़ा है। मान लीजिए कि डोरी ऊर्ध्वाधर के साथ $\theta$ कोण बनाती है।
गोलक पर दो बल कार्य करते हैं:
$(1)$ डोरी में तनाव $T$ ।
$(2)$ गुरुत्वाकर्षण बल $mg$ जो ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर कार्य करता है।
बल $mg$ को दो घटकों में वियोजित किया जा सकता है:
$(1)$ त्रिज्यीय घटक: $mg \cos \theta$ (डोरी की दिशा में)।
$(2)$ स्पर्शरेखीय घटक: $mg \sin \theta$ (डोरी के लंबवत)।
प्रत्यानयन बल $F = -mg \sin \theta$ है। छोटे दोलनों के लिए,$\sin \theta \approx \theta$ (रेडियन में)।
अतः,$F = -mg \theta = -mg (x/L)$,जहाँ $x$ विस्थापन है।
$F = -kx$ के साथ तुलना करने पर,हमें $k = mg/L$ प्राप्त होता है।
आवर्तकाल $T = 2\pi \sqrt{m/k} = 2\pi \sqrt{m / (mg/L)} = 2\pi \sqrt{L/g}$ होता है।