(N/A) ध्रुवीय बंधन: ध्रुवीकरण के परिणामस्वरूप,अणु में द्विध्रुव आघूर्ण (dipole moment) होता है।
परिभाषा: द्विध्रुव आघूर्ण को आवेश के परिमाण $(Q)$ और धनात्मक तथा ऋणात्मक आवेश के केंद्रों के बीच की दूरी $(r)$ के गुणनफल के रूप में परिभाषित किया जाता है।
गणितीय अभिव्यक्ति: $\mu = Q \times r$
जहाँ:
$Q = \text{परमाणु पर आवेश का परिमाण (Coulomb में)}$
$r = \text{केंद्रों के बीच की दूरी (meters में)}$
$\mu = \text{द्विध्रुव आघूर्ण (Debye (D) इकाई में)}$
रूपांतरण: $1 \ D = 3.33564 \times 10^{-30} \ C \ m$
निरूपण: द्विध्रुव आघूर्ण एक सदिश राशि है। परंपरा के अनुसार,इसे धनात्मक केंद्र से ऋणात्मक केंद्र की ओर इंगित करने वाले तीर $(\rightarrow)$ द्वारा दर्शाया जाता है। रसायन विज्ञान में,इसे अणु की लुईस संरचना पर एक क्रॉस वाले तीर $(\mapsto)$ द्वारा दर्शाया जाता है,जहाँ क्रॉस धनात्मक सिरे पर और तीर का सिरा ऋणात्मक सिरे पर होता है।
उदाहरण: $HF$ अणु के लिए,द्विध्रुव आघूर्ण को इस प्रकार दर्शाया जा सकता है:
$H^{\delta+} - F^{\delta-} \quad \text{या} \quad H \xrightarrow{\quad} \ddot{F}:$