एक धातु का कार्य फलन (work function) $2.3 \text{ eV}$ है और जब इस पर एक फोटॉन आपतित होता है,तो फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा $0.3 \text{ eV}$ होती है। आपतित फोटॉन की तरंगदैर्घ्य $\mathring A$ में ज्ञात कीजिए।

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एक धातु का कार्य फलन (work function) $3 \ eV$ है। फोटोइलेक्ट्रॉन के उत्सर्जन के लिए आवश्यक दृश्य प्रकाश का रंग क्या है?

यदि आपतित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य $4000 \ \mathring{A}$ से घटाकर $3600 \ \mathring{A}$ कर दी जाए,तो निरोधी विभव (stopping potential) में परिवर्तन ............. $V$ होगा।

कथन : प्रकाशवैद्युत उत्सर्जन की प्रक्रिया में, सभी उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा समान नहीं होती है।
कारण : यदि किसी धातु की प्रकाश-संवेदी सतह पर गिरने वाले विकिरण में अलग-अलग तरंगदैर्ध्य शामिल हैं, तो अलग-अलग तरंगदैर्ध्य के फोटॉन को अवशोषित करने वाले इलेक्ट्रॉनों द्वारा प्राप्त ऊर्जा अलग-अलग होगी।

आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार,धातु से उत्सर्जित प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा बनाम आपतित विकिरण की आवृत्ति का ग्राफ एक सीधी रेखा है जिसका ढाल:

जब $2v_0$ आवृत्ति का प्रकाश (जहाँ $v_0$ देहली आवृत्ति है) एक धातु की प्लेट पर आपतित होता है,तो उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों का अधिकतम वेग $v_1$ है। जब आपतित विकिरण की आवृत्ति को बढ़ाकर $5v_0$ कर दिया जाता है,तो उसी प्लेट से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों का अधिकतम वेग $v_2$ है। $v_1$ और $v_2$ का अनुपात क्या है?

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