(A) संबंध $R = \{(T_{1}, T_{2}) : T_{1}, T_{2} \text{ के समरूप है}\}$ के रूप में परिभाषित है।
$1$. स्वतुल्यता: प्रत्येक त्रिभुज $T_{1}$ स्वयं के समरूप होता है। इसलिए,$(T_{1}, T_{1}) \in R$. अतः,$R$ स्वतुल्य है।
$2$. सममितता: यदि $(T_{1}, T_{2}) \in R$,तो $T_{1}, T_{2}$ के समरूप है। इसका अर्थ है कि $T_{2}, T_{1}$ के समरूप है। इसलिए,$(T_{2}, T_{1}) \in R$. अतः,$R$ सममित है।
$3$. संक्रामकता: यदि $(T_{1}, T_{2}) \in R$ और $(T_{2}, T_{3}) \in R$,तो $T_{1}, T_{2}$ के समरूप है और $T_{2}, T_{3}$ के समरूप है। इसका अर्थ है कि $T_{1}, T_{3}$ के समरूप है। इसलिए,$(T_{1}, T_{3}) \in R$. अतः,$R$ संक्रामक है।
चूंकि $R$ स्वतुल्य,सममित और संक्रामक है,इसलिए यह एक तुल्यता संबंध है।
त्रिभुजों के लिए:
$T_{1}$ (भुजाएँ $3, 4, 5$) और $T_{3}$ (भुजाएँ $6, 8, 10$) के लिए:
$\frac{3}{6} = \frac{4}{8} = \frac{5}{10} = \frac{1}{2}$.
चूंकि संगत भुजाओं का अनुपात समान है,इसलिए $T_{1}, T_{3}$ के समरूप है।
अतः,$T_{1}$ और $T_{3}$ संबंधित हैं।