(N/A) मान लीजिए कि चित्र में दिखाए अनुसार बिंदु $G$ है और उस बिंदु पर दो विस्थापनों के बीच कलांतर $\phi$ है।
यदि $S_{1}$ द्वारा $G$ पर उत्पन्न विस्थापन $y_{1} = a \cos \omega t$ है,तो $S_{2}$ द्वारा $G$ पर उत्पन्न विस्थापन $y_{2} = a \cos (\omega t + \phi)$ होगा।
अध्यारोपण के सिद्धांत के अनुसार परिणामी विस्थापन:
$y = y_{1} + y_{2} = a \cos \omega t + a \cos (\omega t + \phi)$
$y = a [\cos \omega t + \cos (\omega t + \phi)]$
त्रिकोणमितीय सर्वसमिका $\cos A + \cos B = 2 \cos \left(\frac{A+B}{2}\right) \cos \left(\frac{A-B}{2}\right)$ का उपयोग करने पर:
$y = 2a \cos \left(\frac{\phi}{2}\right) \cos \left(\omega t + \frac{\phi}{2}\right)$
परिणामी विस्थापन का आयाम $A_{res} = 2a \cos \left(\frac{\phi}{2}\right)$ है।
चूंकि तीव्रता $I \propto A_{res}^2$ होती है,इसलिए:
$I \propto 4a^2 \cos^2 \left(\frac{\phi}{2}\right)$
$I = 4I_{0} \cos^2 \left(\frac{\phi}{2}\right)$,जहाँ $I_{0} \propto a^2$ प्रत्येक व्यक्तिगत स्रोत की तीव्रता है।
संपोषी व्यतिकरण (अधिकतम तीव्रता) के लिए,कलांतर $\phi = 0, \pm 2\pi, \pm 4\pi, \dots$ (अर्थात $\phi = 2n\pi$ जहाँ $n$ एक पूर्णांक है) होना चाहिए।
विनाशी व्यतिकरण (न्यूनतम तीव्रता) के लिए,कलांतर $\phi = \pm \pi, \pm 3\pi, \pm 5\pi, \dots$ (अर्थात $\phi = (2n+1)\pi$ जहाँ $n$ एक पूर्णांक है) होना चाहिए।