(N/A) मान लीजिए कि दो प्रगामी हार्मोनिक तरंगें एक तनी हुई डोरी पर समान कोणीय आवृत्ति $(\omega)$,कोणीय तरंग संख्या $(k)$ और आयाम $(a)$ के साथ चल रही हैं।
दोनों तरंगों को इस प्रकार दर्शाया जा सकता है:
$y_{1}(x, t) = a \sin(kx - \omega t)$
$y_{2}(x, t) = a \sin(kx - \omega t + \phi)$
जहाँ $\phi$ दोनों तरंगों के बीच का स्थिर कलांतर है।
अध्यारोपण के सिद्धांत के अनुसार,परिणामी विस्थापन $y(x, t)$ व्यक्तिगत विस्थापनों का बीजगणितीय योग है:
$y(x, t) = y_{1}(x, t) + y_{2}(x, t)$
$y(x, t) = a \sin(kx - \omega t) + a \sin(kx - \omega t + \phi)$
त्रिकोणमितीय सर्वसमिका $\sin C + \sin D = 2 \sin \left( \frac{C+D}{2} \right) \cos \left( \frac{C-D}{2} \right)$ का उपयोग करते हुए,जहाँ $C = kx - \omega t$ और $D = kx - \omega t + \phi$:
$y(x, t) = 2a \sin \left( \frac{kx - \omega t + kx - \omega t + \phi}{2} \right) \cos \left( \frac{kx - \omega t - (kx - \omega t + \phi)}{2} \right)$
$y(x, t) = 2a \sin \left( kx - \omega t + \frac{\phi}{2} \right) \cos \left( -\frac{\phi}{2} \right)$
चूंकि $\cos(-\theta) = \cos(\theta)$:
$y(x, t) = [2a \cos(\frac{\phi}{2})] \sin(kx - \omega t + \frac{\phi}{2})$
यह परिणामी प्रगामी तरंग का समीकरण है जिसका आयाम $2a \cos(\frac{\phi}{2})$ और प्रारंभिक कला $\frac{\phi}{2}$ है।