(N/A) मान लीजिए कि दो विद्युत आवेश $q_{1}$ और $q_{2}$ को अनंत से बाह्य विद्युत क्षेत्र $\overrightarrow{E}$ में क्रमशः स्थिति सदिश $\overrightarrow{r_{1}}$ और $\overrightarrow{r_{2}}$ वाले बिंदुओं तक लाया जाता है।
आवेश $q_{1}$ को अनंत से स्थिति $\overrightarrow{r_{1}}$ तक लाने में किया गया कार्य:
$W_{1} = q_{1} V(\overrightarrow{r_{1}}) \quad \dots (1)$
इसके बाद,आवेश $q_{2}$ को अनंत से स्थिति $\overrightarrow{r_{2}}$ तक लाने में किया गया कार्य दो क्षेत्रों के विरुद्ध होता है: बाह्य विद्युत क्षेत्र $\overrightarrow{E}$ और आवेश $q_{1}$ द्वारा उत्पन्न विद्युत क्षेत्र।
बाह्य क्षेत्र के विरुद्ध किया गया कार्य:
$W_{2} = q_{2} V(\overrightarrow{r_{2}}) \quad \dots (2)$
$q_{1}$ द्वारा उत्पन्न क्षेत्र के विरुद्ध किया गया कार्य:
$W_{3} = \frac{k q_{1} q_{2}}{r_{12}} \quad \dots (3)$
जहाँ $r_{12}$ आवेशों $q_{1}$ और $q_{2}$ के बीच की दूरी है।
निकाय की कुल स्थितिज ऊर्जा $U$ इस विन्यास को बनाने में किए गए कुल कार्य के योग के बराबर होती है:
$U = W_{1} + W_{2} + W_{3}$
$U = q_{1} V(\overrightarrow{r_{1}}) + q_{2} V(\overrightarrow{r_{2}}) + \frac{k q_{1} q_{2}}{r_{12}}$