(N/A) कल्पना करें कि पृथ्वी बड़ी संख्या में संकेंद्रित गोलीय कोशों से बनी है,जिसमें सबसे छोटा कोश केंद्र पर और सबसे बड़ा सतह पर है।
पृथ्वी के बाहर का कोई भी बिंदु सभी कोशों के बाहर होता है। अतः,सभी कोश उस बिंदु पर गुरुत्वाकर्षण बल लगाते हैं जैसे कि उनका द्रव्यमान उनके सामान्य केंद्र पर केंद्रित हो।
पृथ्वी के अंदर के बिंदु के लिए,स्थिति अलग है। मान लीजिए कि पृथ्वी संकेंद्रित कोशों से बनी है। $m$ द्रव्यमान का एक कण केंद्र से $r$ $(r < R_E)$ दूरी पर बिंदु $P$ पर स्थित है। बिंदु $P$,$r$ त्रिज्या वाले गोले के बाहर स्थित है। $r$ से अधिक त्रिज्या वाले कोशों के लिए,बिंदु $P$ अंदर स्थित है। इसलिए,इन बाहरी कोशों द्वारा $P$ पर रखे द्रव्यमान $m$ पर कोई शुद्ध गुरुत्वाकर्षण बल नहीं लगता है।
यदि $P$ पर कण का द्रव्यमान $m$ है और $r$ त्रिज्या वाले आंतरिक गोले का द्रव्यमान $M_r$ है,तो $P$ पर द्रव्यमान $m$ पर लगने वाले बल का परिमाण:
$F = \frac{G m M_r}{r^2}$
यह मानते हुए कि पूरी पृथ्वी का घनत्व $\rho$ समान है,इसका कुल द्रव्यमान $M_E = (\frac{4}{3} \pi R_E^3) \rho$ है।
अतः,$\rho = \frac{M_E}{\frac{4}{3} \pi R_E^3}$।
आंतरिक गोले का द्रव्यमान $M_r = (\frac{4}{3} \pi r^3) \rho = (\frac{4}{3} \pi r^3) \frac{M_E}{\frac{4}{3} \pi R_E^3} = M_E \frac{r^3}{R_E^3}$ है।
बल के समीकरण में $M_r$ का मान रखने पर:
$F = \frac{G m}{r^2} (M_E \frac{r^3}{R_E^3}) = \frac{G M_E m r}{R_E^3}$।
चूंकि $F = mg_r$,इसलिए $r$ दूरी पर गुरुत्वीय त्वरण $g_r = \frac{G M_E r}{R_E^3}$ है।
पृथ्वी की सतह पर,$r = R_E$ रखने पर:
$g = \frac{G M_E R_E}{R_E^3} = \frac{G M_E}{R_E^2}$।