(N/A) रचना: एक रेखाखंड $RT$ खींचिए जो $PS$ के समांतर हो और बढ़ाई गई रेखाखंड $QP$ को बिंदु $T$ पर प्रतिच्छेद करे।
दिया गया है कि,$PS$,$\angle QPR$ का कोण समद्विभाजक है।
इसलिए,$\angle QPS = \angle SPR \quad \dots(1)$
रचना के अनुसार,$PS \parallel TR$ और $QT$ एक तिर्यक रेखा है।
इसलिए,$\angle QPS = \angle QTR$ (संगत कोण) $\quad \dots(2)$
साथ ही,$PS \parallel TR$ और $PR$ एक तिर्यक रेखा है।
इसलिए,$\angle SPR = \angle PRT$ (एकांतर अंतःकोण) $\quad \dots(3)$
समीकरण $(1)$,$(2)$,और $(3)$ से,हमें प्राप्त होता है:
$\angle QTR = \angle PRT$
$\Delta PTR$ में,चूंकि $\angle QTR = \angle PRT$,इसलिए इन कोणों के सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।
अतः,$PT = PR \quad \dots(4)$
$\Delta QTR$ में,चूंकि $PS \parallel TR$,आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय $(BPT)$ के अनुसार:
$\frac{QS}{SR} = \frac{QP}{PT}$
समीकरण $(4)$ से $PT = PR$ का मान उपरोक्त व्यंजक में रखने पर:
$\frac{QS}{SR} = \frac{PQ}{PR}$
अतः,यह सिद्ध हुआ।