यदि $4 \ A$ की धारा $400$ फेरों वाली कुंडली से $3 \times 10^{-3} \ Wb$ का चुंबकीय फ्लक्स उत्पन्न करती है,तो कुंडली में संचित ऊर्जा होगी: ($J$ में)

  • A
    $1.2$
  • B
    $2.4$
  • C
    $24$
  • D
    $240$

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$10 \, \Omega$ प्रतिरोध और $5 \, H$ प्रेरकत्व वाली एक कुंडली को $100 \, V$ की बैटरी से जोड़ा जाता है। कुंडली में संचित ऊर्जा है:

कथन : यदि किसी परिनालिका (solenoid) में धारा की दिशा को परिमाण समान रखते हुए उलट दिया जाए,तो परिनालिका में संचित चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है।
कारण : चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा घनत्व चुंबकीय क्षेत्र के समानुपाती होता है।

एक कुंडली का प्रेरकत्व $2 \, H$ और प्रतिरोध $4 \, \Omega$ है। कुंडली पर $10 \, V$ का विभवांतर लगाया जाता है। जब धारा अपने संतुलन मान तक पहुँच जाती है,तो चुंबकीय क्षेत्र में संचित ऊर्जा $.......... \times 10^{-2} \, J$ होगी।

एक $100\, mH$ की कुंडली में $1\, A$ की धारा प्रवाहित हो रही है। इसके चुंबकीय क्षेत्र में संचित ऊर्जा......$J$ है।

$2 \ H$ प्रेरकत्व वाले एक परिनालिका (solenoid) में $1 \ A$ की धारा प्रवाहित हो रही है। परिनालिका में संचित चुंबकीय ऊर्जा कितनी है ($J$ में)?

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