यदि किसी आवेशित गोलीय चालक जिसकी त्रिज्या $10\,cm$ है के केन्द्र से $5\,cm$ की दूरी पर विभव $V$ है, तो इसके केन्द्र से $15\,cm$ दूरी पर विभव होगा
$\frac{1}{3}\,V$
$\frac{2}{3}\,V$
$\frac{3}{2}\,V$
$3\,V$
$2 \,cm$ त्रिज्या की $64$ सर्वसम बूँदों में प्रत्येक पर ${10^{ - 9}}\,C$ आवेश रखा जाता है। अब उन्हें संयुक्त कर एक बड़ी बूँद बनायी जाती है। इसका विभव ज्ञात कीजिए
$1000$ पानी की छोटी बूँदें जिनमें प्रत्येक की त्रिज्या $r$ एवं आवेश $q$ है, एक साथ मिलकर एक गोलाकार बूँद बनाती हैं। बड़ी बूँद का विभव छोटी बूँद के विभव का है
त्रिज्या $R$ के एक वृत्त की परिधि पर $10$ आवेश ऐसे रखे गये हैं जिससे क्रमागत आवेशों के बीच कोणीय दूरी समान रहें। एकान्तर आवेशों $1,3,5,7,9$ के ऊपर क्रमशः $(+q)$ आवेश और $2 ,4,6,8,10$ के ऊपर क्रमशः $(-q)$ आवेश हैं। वृत्त के केन्द्र पर विभव $(V)$ और विधुत क्षेत्र $( E )$ होगी।
(अनन्त पर $V =0$ लीजिए)
किसी क्षेत्र में मूल बिन्दु के चारों ओर विद्युत क्षेत्र एक समान है एवं $x$ - अक्ष के अनुदिश कार्यरत् है। मूल बिन्दु को केन्द्र मान कर एक छोटा सा वृत्त खींचा जाता है जो कि अक्षों को बिन्दुओं $A, B, C$ तथा $D$ पर काटता है। यदि इन बिन्दुओं के निर्देशांक क्रमश: $(a, 0), (0, a), (-a, 0), (0, -a)$ हैं तब किसी बिन्दु पर विभव न्यूनतम होगा
मरकरी की $512$ सर्वसम बूंदों में से प्रत्येक को $2\, V$ के विभव तक आवेशित किया गया है। इन सभी बूंदों को मिलाकर एक बड़ी बूंद बनायी गयी है। इस बड़ी बूंद का विभव $.......\,V$ है।