(N/A) माना $O$ दो संकेंद्रीय वृत्तों का उभयनिष्ठ केंद्र है। माना $AB$ बाहरी वृत्त की एक जीवा है जो आंतरिक वृत्त को बिंदु $C$ पर स्पर्श करती है।
चूंकि त्रिज्या स्पर्श बिंदु पर स्पर्श रेखा के लंबवत होती है,इसलिए $OC \perp AB$ है।
समकोण त्रिभुज $\Delta OCB$ में,पाइथागोरस प्रमेय के अनुसार:
$OC^{2} + CB^{2} = OB^{2}$
यहाँ,$OC$ आंतरिक वृत्त की त्रिज्या है,इसलिए $OC = \frac{d_{1}}{2}$।
$OB$ बाहरी वृत्त की त्रिज्या है,इसलिए $OB = \frac{d_{2}}{2}$।
चूंकि केंद्र से जीवा पर डाला गया लंब जीवा को समद्विभाजित करता है,इसलिए $CB = \frac{c}{2}$।
इन मानों को समीकरण में प्रतिस्थापित करने पर:
$(\frac{d_{1}}{2})^{2} + (\frac{c}{2})^{2} = (\frac{d_{2}}{2})^{2}$
$\frac{d_{1}^{2}}{4} + \frac{c^{2}}{4} = \frac{d_{2}^{2}}{4}$
दोनों पक्षों को $4$ से गुणा करने पर,हमें प्राप्त होता है:
$d_{1}^{2} + c^{2} = d_{2}^{2}$
अतः,$d_{2}^{2} = c^{2} + d_{1}^{2}$।