ठोस उत्प्रेरकों की महत्वपूर्ण विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
$(a)$ सक्रियता (Activity): उत्प्रेरक की सक्रियता काफी हद तक रसोवशोषण (chemisorption) की मजबूती पर निर्भर करती है। सक्रिय होने के लिए अभिकारकों को उत्प्रेरक पर उचित रूप से अधिशोषित होना चाहिए। हालाँकि,उन्हें इतनी मजबूती से अधिशोषित नहीं होना चाहिए कि वे स्थिर हो जाएं और अन्य अभिकारकों के लिए उत्प्रेरक की सतह पर अधिशोषण के लिए कोई जगह न बचे।
उदाहरण: $2H_{2(g)} + O_{2(g)} \xrightarrow{Pt} 2H_2O_{(l)}$
$(b)$ चयनात्मकता (Selectivity): उत्प्रेरक की चयनात्मकता उसकी वह क्षमता है जो किसी अभिक्रिया को विशेष उत्पाद देने के लिए निर्देशित करती है,जब समान अभिक्रिया स्थितियों में कई उत्पाद संभव हों।
समान अभिकारकों के लिए अलग-अलग उत्प्रेरकों की चयनात्मकता अलग-अलग होती है। उदाहरण के लिए,$H_2$ और $CO$ से शुरू करके और अलग-अलग उत्प्रेरकों का उपयोग करके,हमें अलग-अलग उत्पाद मिलते हैं:
$(i)$ $CO_{(g)} + 3H_{2(g)} \xrightarrow{Ni} CH_{4(g)} + H_2O_{(g)}$
$(ii)$ $CO_{(g)} + 2H_{2(g)} \xrightarrow{Cu/ZnO-Cr_2O_3} CH_3OH_{(g)}$
$(iii)$ $CO_{(g)} + H_{2(g)} \xrightarrow{Cu} HCHO_{(g)}$
इस प्रकार,यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि उत्प्रेरक की क्रिया प्रकृति में अत्यधिक चयनात्मक होती है। परिणामस्वरूप,जो पदार्थ एक अभिक्रिया में उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है,वह दूसरी अभिक्रिया को उत्प्रेरित करने में विफल हो सकता है।