(A) सांतत्य समीकरण के अनुसार, $A_1 V_1 = A_2 V_2$, जहाँ $A$ अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है और $V$ द्रव का वेग है।
पाइप के संकीर्ण भाग (वेंचुरीमीटर) में, अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल $A_2$ चौड़े भाग के क्षेत्रफल $A_1$ से कम होता है।
इसलिए, संकीर्ण भाग में द्रव का वेग $V_2$ चौड़े भाग के वेग $V_1$ से अधिक होना चाहिए $(V_2 > V_1)$।
बर्नौली के सिद्धांत के अनुसार, एक असंपीड्य और अश्यान द्रव के क्षैतिज प्रवाह के लिए, प्रति इकाई आयतन दाब ऊर्जा और गतिज ऊर्जा का योग स्थिर रहता है। इसका अर्थ है कि जहाँ द्रव का वेग अधिक होता है, वहाँ दाब कम होना चाहिए।
चूंकि $V_2 > V_1$, इसलिए संकीर्ण भाग पर दाब $P_2$ चौड़े भाग के दाब $P_1$ से कम होना चाहिए $(P_2 < P_1)$।
दाब का संबंध ऊर्ध्वाधर नलियों में द्रव स्तंभ की ऊँचाई $(h)$ से $P = \rho gh$ के द्वारा होता है। अतः, कम दाब का अर्थ है द्रव का निचला स्तर।
परिणामस्वरूप, संकीर्ण भाग से जुड़ी नली में द्रव का स्तर चौड़े भाग से जुड़ी नली के स्तर से नीचे होना चाहिए।
चित्रों की तुलना करने पर, चित्र $(a)$ संकीर्ण भाग में ऊँचा स्तर दिखाता है, जो बर्नौली के सिद्धांत के विपरीत है। इसलिए, चित्र $(a)$ गलत है।