(N/A) बर्नौली का सिद्धांत बताता है कि एक असंपीड्य, अश्यान और धारा रेखीय प्रवाह के लिए, प्रति इकाई आयतन में दाब ऊर्जा, गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग स्थिर रहता है।
मानव परिसंचरण तंत्र में, धमनियों की आंतरिक दीवारों पर प्लाक (वसा) जमा होने के कारण वे संकुचित हो सकती हैं।
सांतत्य समीकरण $(A_1v_1 = A_2v_2)$ के अनुसार, जब धमनी का अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल $(A)$ कम हो जाता है, तो रक्त प्रवाह का वेग $(v)$ बढ़ जाता है।
बर्नौली के सिद्धांत $(P + \frac{1}{2}\rho v^2 + \rho gh = \text{constant})$ को लागू करने पर, जैसे ही संकुचित क्षेत्र में रक्त का वेग बढ़ता है, आंतरिक द्रव दाब $(P)$ कम हो जाता है।
यदि आंतरिक दाब काफी कम हो जाता है, तो आसपास के ऊतकों का बाहरी दाब धमनी को पिचकने (collapse) के लिए मजबूर कर सकता है।
हृदय तब इस संकुचन के माध्यम से रक्त को धकेलने के लिए अतिरिक्त दबाव डालता है। जैसे ही रक्त इस संकीर्ण मार्ग से तेजी से गुजरता है, उच्च वेग के कारण दाब फिर से गिर जाता है।
संकुचन और दाब में गिरावट का यह चक्र धमनी के पूर्ण अवरोध का कारण बन सकता है, जिसके परिणामस्वरूप दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ता है।