(N/A) काष्ठीय द्विबीजपत्री तनों में द्वितीयक वृद्धि में संवहनी एधा (vascular cambium) के एक निरंतर वलय का निर्माण शामिल है। अंतःपूलीय एधा (संवहनी बंडलों के भीतर मौजूद) और अंतरापूलीय एधा (मज्जा किरणों से बनी) मिलकर इस वलय का निर्माण करती हैं।
एधा वलय सक्रिय हो जाता है और दोनों तरफ नई कोशिकाओं का निर्माण शुरू कर देता है। परिधि की ओर बनने वाली कोशिकाएं द्वितीयक फ्लोएम के रूप में विभेदित होती हैं,जबकि केंद्र (मज्जा) की ओर बनने वाली कोशिकाएं द्वितीयक जाइलम के रूप में विभेदित होती हैं। द्वितीयक जाइलम का उत्पादन द्वितीयक फ्लोएम की तुलना में बहुत अधिक होता है,जो प्राथमिक फ्लोएम और वल्कुट (cortex) को बाहर की ओर धकेलता है,जिससे अंततः वे कुचल जाते हैं।
इसके अतिरिक्त,वल्कुट में काग एधा (phellogen) विकसित होता है,जो बाहर की ओर काग (phellem) और अंदर की ओर द्वितीयक वल्कुट (phelloderm) बनाता है,जो सामूहिक रूप से परिचर्म (periderm) का निर्माण करते हैं।
महत्व:
$1$. यह तने की मोटाई (व्यास) को बढ़ाता है।
$2$. यह पौधे को अतिरिक्त यांत्रिक सहारा प्रदान करता है।
$3$. यह पत्तियों की बढ़ती संख्या को सहारा देने के लिए जाइलम और फ्लोएम की संवहन क्षमता को बढ़ाता है।