(N/A) एंजाइम के कोलाइडल कणों की सतह पर कई गुहाएं (cavities) मौजूद होती हैं। ये गुहाएं विशिष्ट आकार की होती हैं और इनमें $-NH_2$,$-COOH$,$-SH$,$-OH$ आदि जैसे सक्रिय समूह होते हैं। ये वास्तव में एंजाइम कणों की सतह पर सक्रिय केंद्र होते हैं। अभिकारक के अणु जिनका आकार पूरक होता है,इन गुहाओं में वैसे ही फिट हो जाते हैं जैसे ताले में चाबी फिट होती है। सक्रिय समूहों की उपस्थिति के कारण,एक सक्रिय संकुल (activated complex) बनता है जो बाद में विघटित होकर उत्पाद प्रदान करता है।
इस प्रकार,एंजाइम उत्प्रेरित अभिक्रियाएं दो चरणों में आगे बढ़ती हैं।
चरण-$1$: सक्रिय संकुल बनाने के लिए एंजाइम का अभिकारक (substrate) के साथ जुड़ना।
$E + S \rightleftharpoons ES^{*}$
चरण-$2$: उत्पाद बनाने के लिए सक्रिय संकुल का विघटन।
$ES^{*} \rightarrow E + P$