(N/A) केंचुए में,उत्सर्जी अंग खंडीय रूप से व्यवस्थित कुंडलित नलिकाओं के रूप में होते हैं जिन्हें उत्सर्जिका (nephridia) कहा जाता है। ये तीन प्रकार की होती हैं:
$(i)$ ग्रसनी उत्सर्जिका (Pharyngeal nephridia): ये खंड $4$,$5$ और $6$ में स्थित होती हैं।
(ii) त्वचीय उत्सर्जिका (Integumentary nephridia): ये खंड $3$ से अंतिम खंड तक शरीर की दीवार की परत से जुड़ी होती हैं,जो शरीर की सतह पर खुलती हैं।
(iii) पट उत्सर्जिका (Septal nephridia): ये खंड $15$ से अंतिम खंड तक अंतरखंडीय पट (intersegmental septa) के दोनों ओर मौजूद होती हैं,जो आंत में खुलती हैं।
पहले दो खंडों में कोई उत्सर्जिका मौजूद नहीं होती है।
त्वचीय उत्सर्जिका उत्सर्जी पदार्थों को शरीर की दीवार पर उत्सर्जित करती हैं। इस प्रकार के उत्सर्जन को बाह्य उत्सर्जन (exonephric excretion) कहा जाता है।
ग्रसनी और पट उत्सर्जिका उत्सर्जी पदार्थों को आहार नली (मुख गुहा और आंत) में डालती हैं। इस प्रकार के उत्सर्जन को आंतरिक उत्सर्जन (enteronephric excretion) कहा जाता है।
ये विभिन्न प्रकार की उत्सर्जिकाएं संरचना में मूल रूप से समान होती हैं। उत्सर्जिकाएं शरीर के तरल पदार्थों के आयतन और संरचना को नियंत्रित करती हैं।
एक उत्सर्जिका एक कीप (funnel) के रूप में शुरू होती है जो देहगुहा (coelomic chamber) से अतिरिक्त तरल पदार्थ एकत्र करती है। कीप उत्सर्जिका के एक नलिकाकार भाग से जुड़ती है,जो अपशिष्ट पदार्थों को एक छिद्र के माध्यम से शरीर की दीवार की सतह पर या पाचन नली में पहुंचाती है।