(N/A) $(i)$ मेंडल ने मटर के पौधे $(Pisum \text{ } sativum)$ पर काम किया और वंशागति के मूलभूत नियमों की खोज की। उन्होंने पाया कि लक्षण (traits) कारकों (factors) द्वारा नियंत्रित होते हैं (जिन्हें अब जीन कहा जाता है) और प्रत्येक कारक (जीन) जोड़े में होता है। ये कारक (जीन) अलग इकाइयों के रूप में विरासत में मिलते हैं, प्रत्येक जनक से एक।
$(ii)$ मेंडल ने अध्ययन किया कि युग्मकों (नर में शुक्राणु और मादा में अंडाणु) के निर्माण के दौरान जीन अलग हो जाते हैं और वे फिर से संतानों में जुड़ जाते हैं (प्रत्येक जनक से एक) और प्रभावी या अप्रभावी लक्षण के रूप में दिखाई देते हैं।
$(iii)$ मेंडल ने तीन नियम प्रस्तावित किए, जो इस प्रकार हैं:
$(a)$ पृथक्करण का नियम (Law of segregation): प्रत्येक विरासत में मिला लक्षण जीन के एक जोड़े द्वारा परिभाषित होता है। जनक जीन यादृच्छिक रूप से जनन कोशिकाओं में अलग हो जाते हैं ताकि प्रत्येक जनन कोशिका में जीन के जोड़े में से केवल एक ही जीन हो।
$(b)$ स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of independent assortment): विभिन्न लक्षणों के जीन एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से अलग होते हैं ताकि एक लक्षण की वंशागति दूसरे लक्षण की वंशागति पर निर्भर न हो।
$(c)$ प्रभाविता का नियम (Law of dominance): जीन के वैकल्पिक रूपों वाला जीव उस रूप को व्यक्त करेगा जो प्रभावी है।