(N/A) समयुग्मजी पौधों में किसी विशेष लक्षण के लिए समान एलील (जैसे $TT$ या $tt$) होते हैं। युग्मक निर्माण के दौरान,सभी युग्मक एक ही एलील ले जाते हैं,जिससे यह सुनिश्चित होता है कि सभी संतानों को समान आनुवंशिक संरचना प्राप्त हो,इस प्रकार वे शुद्ध संतति उत्पन्न करते हैं।
$(b)$ यदि कोई जीव किसी विशिष्ट लक्षण के लिए दो अलग-अलग एलील (जैसे $Tt$) रखता है,तो उसे विषमयुग्मजी कहा जाता है।
$(c)$ प्रजातिकरण निम्नलिखित कारकों के कारण होता है:
$(i)$ प्राकृतिक चयन: पर्यावरणीय दबावों के आधार पर उत्तरजीविता और प्रजनन में अंतर।
$(ii)$ भौगोलिक अलगाव: भौतिक बाधाएं जो आबादी के बीच जीन प्रवाह को रोकती हैं।
$(iii)$ आनुवंशिक विचलन (Genetic drift): एक छोटी आबादी में एलील आवृत्तियों में यादृच्छिक परिवर्तन।
$(iv)$ प्रजनन अलगाव: $DNA$ या गुणसूत्रों की संख्या में संचित विभिन्नताएं दो समूहों के बीच अंतर-प्रजनन को रोकती हैं,जिससे एक नई प्रजाति का निर्माण होता है।