| $1.$ अभिक्रिया की दर | $S_{N}1$ केवल एल्किल हैलाइड की सांद्रता पर निर्भर करती है,जबकि $S_{N}2$ एल्किल हैलाइड और न्यूक्लियोफाइल दोनों की सांद्रता पर निर्भर करती है। |
| $2.$ अभिक्रिया की कोटि | $S_{N}1$ प्रथम कोटि की अभिक्रिया है,जबकि $S_{N}2$ द्वितीय कोटि की अभिक्रिया है। |
| $3.$ न्यूक्लियोफाइल की प्रकृति | $S_{N}1$ दुर्बल न्यूक्लियोफाइल द्वारा होती है,जबकि $S_{N}2$ के लिए प्रबल न्यूक्लियोफाइल आवश्यक है। |
| $4.$ एल्किल हैलाइड की अभिक्रियाशीलता | $S_{N}1$ के लिए $3^{\circ} > 2^{\circ} > 1^{\circ} > \text{Methyl}$,जबकि $S_{N}2$ के लिए $\text{Methyl} > 1^{\circ} > 2^{\circ} > 3^{\circ}$. |
| $5.$ मध्यवर्ती उत्पाद | $S_{N}1$ में कार्बोनियम आयन मध्यवर्ती बनता है,जबकि $S_{N}2$ में कोई मध्यवर्ती नहीं बनता,यह पंचसंयोजक संक्रमण अवस्था से गुजरती है। |
| $6.$ विलायक की प्रकृति | $S_{N}1$ ध्रुवीय प्रोटिक विलायकों में होती है,जबकि $S_{N}2$ ध्रुवीय एप्रोटिक विलायकों में होती है। |
| $7.$ त्रिविम रसायन | $S_{N}1$ आंशिक रेसेमीकरण का कारण बनती है,जबकि $S_{N}2$ हमेशा विन्यास का प्रतिपन्न (Walden inversion) करती है। |
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