(N/A) यदि दो द्रवों के क्वथनांक में अंतर कम है,तो प्रभाजी आसवन (fractional distillation) विधि का उपयोग किया जाता है।
द्रव मिश्रण की वाष्प कॉलम से गुजरने से पहले संघनित हो जाती है। यह आसवन कॉलम चित्र में दिखाए अनुसार एक गोल पेंदी वाले फ्लास्क (round-bottom flask) के साथ व्यवस्थित होता है।
यदि क्वथनांक में अंतर बहुत कम है,तो चित्र में दिखाए अनुसार बबल प्लेट प्रकार के प्रभाजी कॉलम का उपयोग किया जाता है।
बबल प्लेट कॉलम में,टॉवर को छिद्रों वाली अलमारियों (shelves) के माध्यम से कई डिब्बों में विभाजित किया जाता है। छिद्रों को बबल कैप्स नामक कैप्स से ढका जाता है।
प्रत्येक शेल्फ में एक ओवरफ्लो पाइप होता है जो द्रव को एक निश्चित स्तर पर रखता है और बाकी को निचली शेल्फ पर टपकने देता है।
इस प्रकार के कॉलम का उपयोग द्रवों की भारी मात्रा को लगातार अलग करने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए,रेक्टिफाइड स्पिरिट के निर्माण के लिए किण्वित द्रव का आसवन।
औद्योगिक अनुप्रयोग:
$(i)$ पेट्रोलियम उद्योग में कच्चे तेल का गैसोलीन,केरोसिन,डीजल,लुब्रिकेटिंग ऑयल आदि जैसे विभिन्न उपयोगी अंशों में पृथक्करण।
$(ii)$ लकड़ी के विनाशकारी आसवन से प्राप्त पाइरोलिग्नियस एसिड से पानी और मेथनॉल का पृथक्करण।