(N/A) मान लीजिए कि $m$ द्रव्यमान का एक पिंड $X$-अक्ष के अनुदिश एक परिवर्ती बल $F(x)$ के प्रभाव में गति कर रहा है। पिंड की गतिज ऊर्जा $K = \frac{1}{2}mv^2$ है।
समय $t$ के सापेक्ष $K$ का अवकलन करने पर:
$\frac{dK}{dt} = \frac{d}{dt} \left( \frac{1}{2}mv^2 \right) = \frac{1}{2}m \cdot 2v \cdot \frac{dv}{dt} = mv \cdot a$
न्यूटन के गति के दूसरे नियम $F = ma$ का उपयोग करने पर:
$\frac{dK}{dt} = Fv$
चूंकि वेग $v = \frac{dx}{dt}$ है,इसलिए:
$\frac{dK}{dt} = F \frac{dx}{dt}$
दोनों पक्षों को $dt$ से गुणा करने पर:
$dK = F dx$
प्रारंभिक स्थिति $x_i$ (जहाँ गतिज ऊर्जा $K_i$ है) से अंतिम स्थिति $x_f$ (जहाँ गतिज ऊर्जा $K_f$ है) तक समाकलन करने पर:
$\int_{K_i}^{K_f} dK = \int_{x_i}^{x_f} F(x) dx$
$K_f - K_i = \int_{x_i}^{x_f} F(x) dx$
चूंकि परिवर्ती बल द्वारा किया गया कार्य $W = \int_{x_i}^{x_f} F(x) dx$ होता है,इसलिए:
$W = K_f - K_i = \Delta K$
यह परिवर्ती बल के लिए कार्य-ऊर्जा प्रमेय है। यह बताता है कि किसी पिंड पर नेट बल द्वारा किया गया कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है।