(A) पेरोक्साइड की अनुपस्थिति में प्रोपीन में $HBr$ का योग मार्कोवनिकोव नियम का पालन करता है,जो एक इलेक्ट्रॉनस्नेही योग अभिक्रिया है।
$HBr$ वियोजित होकर इलेक्ट्रॉनस्नेही $H^+$ प्रदान करता है। यह $H^+$ द्वि-आबंध पर आक्रमण करके $1^{\circ}$ और $2^{\circ}$ कार्बोकैटायन बनाता है:
$CH_3-CH=CH_2 + H^+ \to CH_3-CH_2-CH_2^+$ (प्राथमिक,कम स्थायी)
$CH_3-CH=CH_2 + H^+ \to CH_3-CH^+-CH_3$ (द्वितीयक,अधिक स्थायी)
चूंकि द्वितीयक कार्बोकैटायन अधिक स्थायी है,यह तेजी से बनता है और $Br^-$ के साथ अभिक्रिया करके मुख्य उत्पाद के रूप में $2$-ब्रोमोप्रोपेन देता है।
बेंज़ोयल पेरोक्साइड की उपस्थिति में,अभिक्रिया मुक्त मूलक क्रियाविधि (पेरोक्साइड प्रभाव या खाराश प्रभाव) का पालन करती है,जो प्रति-मार्कोवनिकोव योग है:
$1$. प्रारंभन: बेंज़ोयल पेरोक्साइड का समांश विखंडन होकर फेनिल मूलक बनते हैं,जो $HBr$ के साथ अभिक्रिया करके $Br^{\centerdot}$ उत्पन्न करते हैं।
$2$. संचरण: $Br^{\centerdot}$ प्रोपीन पर आक्रमण करके द्वितीयक मुक्त मूलक $(CH_3-overset{\centerdot}{C}H-CH_2Br)$ बनाता है जो प्राथमिक मूलक $(CH_3-CH(Br)-overset{\centerdot}{C}H_2)$ से अधिक स्थायी है।
$3$. द्वितीयक मूलक $HBr$ के साथ अभिक्रिया करके मुख्य उत्पाद के रूप में $1$-ब्रोमोप्रोपेन बनाता है और $Br^{\centerdot}$ पुनः उत्पन्न होता है।