$1.07 eV$ कार्य फलन वाली एक धातु की सतह को $332 nm$ तरंगदैर्ध्य के प्रकाश से विकिरणित किया जाता है। फोटो-इलेक्ट्रॉनों के उत्सर्जन को रोकने के लिए आवश्यक मंदक विभव (retarding potential) .............. $V$ है।

  • A
    $4.81$
  • B
    $3.74$
  • C
    $2.66$
  • D
    $1.07$

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$2.5 eV$ और $3.5 eV$ ऊर्जा वाले दो फोटॉन $1.5 eV$ कार्य फलन वाली धातु की सतह पर गिरते हैं। धातु की सतह से उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉनों के अधिकतम वेग का अनुपात क्या है?

$1.8\, eV$ कार्य फलन वाली धातु से प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन की प्रक्रिया में,सबसे अधिक ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा $0.5\, eV$ है। संबंधित निरोधी विभव (stopping potential) ......... $V$ है।

आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार,धातु से उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा और आपतित विकिरण की आवृत्ति के बीच खींचा गया ग्राफ एक सीधी रेखा देता है,जिसका ढाल (slope):

जब $v$ आवृत्ति का प्रकाश किसी धातु पर गिरता है तो फोटोइलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। निम्नलिखित में से गलत कथन चुनिए:

धातु की सतह से फोटोइलेक्ट्रिक उत्सर्जन आपतित किरणों की आवृत्तियों $v_1$ और $v_2$ के लिए होता है। यदि फोटोइलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा का अनुपात $1:K$ है,तो धात्विक सतह की देहली आवृत्ति (threshold frequency) क्या है?

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