(B) जब लोहे की छड़ को इंडक्टर में डाला जाता है,तो कोर की चुंबकीय पारगम्यता (magnetic permeability) बढ़ जाती है,जिससे कॉइल का स्व-प्रेरकत्व (self-inductance) $(L)$ बढ़ जाता है।
कॉइल का प्रेरणिक प्रतिघात (inductive reactance) $X_L = \omega L$ द्वारा दिया जाता है। जैसे-जैसे $L$ बढ़ता है,प्रेरणिक प्रतिघात $X_L$ भी बढ़ता है।
श्रेणी परिपथ का कुल प्रतिबाधा (impedance) $Z = \sqrt{R^2 + X_L^2}$ है,जहाँ $R$ बल्ब का प्रतिरोध है। जैसे-जैसे $X_L$ बढ़ता है,परिपथ की कुल प्रतिबाधा $Z$ बढ़ जाती है।
चूंकि स्रोत वोल्टेज $V$ स्थिर है,इसलिए परिपथ में धारा $I = V/Z$ कम हो जाती है।
लाइट बल्ब की चमक व्यय हुई शक्ति $P = I^2 R$ पर निर्भर करती है। चूंकि धारा $I$ कम हो जाती है,इसलिए बल्ब में व्यय हुई शक्ति कम हो जाती है,और इसलिए,लाइट बल्ब की चमक घट जाती है।