(N/A) प्रेरक (inductor) में संचित चुंबकीय ऊर्जा $U_{B} = \frac{1}{2} L I^{2}$ द्वारा दी जाती है।
सोलेनोइड के लिए,चुंबकीय क्षेत्र $B = \mu_{0} n I$ है,जहाँ $n = N/l$ प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या है।
अतः,$I = \frac{B}{\mu_{0} n}$।
सोलेनोइड का स्व-प्रेरकत्व $L = \mu_{0} n^{2} A l$ होता है।
इन मानों को ऊर्जा के सूत्र में रखने पर:
$U_{B} = \frac{1}{2} (\mu_{0} n^{2} A l) \left(\frac{B}{\mu_{0} n}\right)^{2} = \frac{1}{2} (\mu_{0} n^{2} A l) \left(\frac{B^{2}}{\mu_{0}^{2} n^{2}}\right) = \frac{B^{2} A l}{2 \mu_{0}}$।
$(b)$ चुंबकीय ऊर्जा घनत्व (प्रति इकाई आयतन ऊर्जा) $u_{B} = \frac{U_{B}}{V} = \frac{U_{B}}{A l} = \frac{B^{2}}{2 \mu_{0}}$ है।
समांतर प्लेट संधारित्र में संचित स्थिर-वैद्युत ऊर्जा घनत्व $u_{E} = \frac{1}{2} \varepsilon_{0} E^{2}$ है।
दोनों ही स्थितियों में,ऊर्जा घनत्व क्षेत्र की तीव्रता के वर्ग ($B^{2}$ या $E^{2}$) के समानुपाती होता है। ये समीकरण सामान्य हैं और अंतरिक्ष के किसी भी क्षेत्र के लिए मान्य हैं जहाँ विद्युत या चुंबकीय क्षेत्र मौजूद हैं।