(A) दिया गया है:
फेरों की संख्या,$n = 20$
त्रिज्या,$r = 10 \; cm = 0.1 \; m$
चुंबकीय क्षेत्र,$B = 0.10 \; T$
धारा,$I = 5.0 \; A$
अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल,$A = 10^{-5} \; m^2$
इलेक्ट्रॉन घनत्व,$n_e = 10^{29} \; m^{-3}$
इलेक्ट्रॉन का आवेश,$e = 1.6 \times 10^{-19} \; C$
$(a)$ धारा लूप पर टॉर्क $\tau = N I A B \sin \theta$ द्वारा दिया जाता है। चूंकि चुंबकीय क्षेत्र कुंडली के तल के लंबवत है,इसलिए चुंबकीय क्षेत्र और क्षेत्रफल सदिश के बीच का कोण $\theta = 0^\circ$ है। अतः,$\tau = N I A B \sin(0^\circ) = 0$.
$(b)$ एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में एक बंद धारा लूप पर कुल बल हमेशा शून्य होता है,क्योंकि विपरीत खंडों पर लगने वाले बल एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं।
$(c)$ इलेक्ट्रॉन पर चुंबकीय बल $F = B e v_d$ है,जहाँ $v_d$ अनुगमन वेग (drift velocity) है। अनुगमन वेग $v_d = \frac{I}{n_e e A}$ द्वारा दिया जाता है। इस मान को बल के समीकरण में रखने पर:
$F = B e \left( \frac{I}{n_e e A} \right) = \frac{B I}{n_e A}$
$F = \frac{0.10 \times 5.0}{10^{29} \times 10^{-5}} = \frac{0.5}{10^{24}} = 5 \times 10^{-25} \; N$.
अतः,प्रत्येक इलेक्ट्रॉन पर औसत बल $5 \times 10^{-25} \; N$ है।