$0.5 \ mH$ के स्व-प्रेरकत्व वाली एक कुंडली में $2 \ A$ की धारा प्रवाहित हो रही है। जूल में संचित ऊर्जा . . . . . . है।

  • A
    $1.0$
  • B
    $0.001$
  • C
    $0.5$
  • D
    $0.05$

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कथन : यदि किसी परिनालिका (solenoid) में धारा की दिशा को परिमाण समान रखते हुए उलट दिया जाए,तो परिनालिका में संचित चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है।
कारण : चुंबकीय क्षेत्र ऊर्जा घनत्व चुंबकीय क्षेत्र के समानुपाती होता है।

$20\, \Omega$ प्रतिरोध और $5\, H$ प्रेरकत्व वाली एक कुंडली को $100\, V$ की बैटरी से जोड़ा गया है। कुंडली में संचित ऊर्जा .... $J$ होगी।

जब $4 \ mA$ की धारा एक प्रेरक (inductor) से गुजरती है,यदि इससे जुड़ा फ्लक्स $32 \times 10^{-6} \ T \ m^2$ है,तो प्रेरक में संचित ऊर्जा है

$2 \ H$ प्रेरकत्व वाले एक परिनालिका (solenoid) में $1 \ A$ की धारा प्रवाहित हो रही है। परिनालिका में संचित चुंबकीय ऊर्जा कितनी है ($J$ में)?

$L$ लंबाई वाले सोलेनोइड में संचित चुंबकीय ऊर्जा के लिए व्यंजक,चुंबकीय क्षेत्र $B$ और क्षेत्रफल $A$ के पदों में क्या है?

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