(A-D) $(i)$ $(a)$ क्रोमैटोग्राफी: इस तकनीक का उपयोग उन विलेय पदार्थों को अलग करने के लिए किया जाता है जो एक ही विलायक में घुले होते हैं।
$(b)$ अपकेंद्रण (Centrifugation): इस विधि का उपयोग घनत्व के आधार पर तरल से निलंबित कणों को अलग करने के लिए किया जाता है।
$(c)$ ऊर्ध्वपातन (Sublimation): इस प्रक्रिया का उपयोग किसी ऊर्ध्वपातित होने वाले वाष्पशील घटक को गैर-ऊर्ध्वपातित अशुद्धि से अलग करने के लिए किया जाता है।
$(d)$ चुंबकीय पृथक्करण: इस विधि का उपयोग चुंबकीय पदार्थों को गैर-चुंबकीय पदार्थों से अलग करने के लिए किया जाता है।
$(ii)$ अपकेंद्रण का सिद्धांत यह है कि जब मिश्रण को तेजी से घुमाया जाता है,तो सघन (भारी) कण नीचे बैठ जाते हैं और हल्के कण ऊपर रह जाते हैं।