(N/A) $(i)$ उपग्रह में भारहीनता इसलिए देखी जाती है क्योंकि उपग्रह और उसके अंदर की सभी वस्तुएं पृथ्वी की ओर मुक्त पतन (free fall) की स्थिति में होती हैं। चूंकि शरीर पर गुरुत्वाकर्षण का विरोध करने के लिए कोई बाहरी संपर्क बल (अभिलंब बल) कार्य नहीं कर रहा होता है,इसलिए आभासी भार शून्य हो जाता है।
$(ii)$ दिया गया है:
प्रारंभिक वेग $(u) = 15 \, m s^{-1}$
अधिकतम ऊँचाई पर अंतिम वेग $(v) = 0 \, m s^{-1}$
गुरुत्वीय त्वरण $(g) = -9.8 \, m s^{-2}$
गति के तीसरे समीकरण का उपयोग करने पर: $v^2 - u^2 = 2gh$
$0^2 - (15)^2 = 2 \times (-9.8) \times h$
$-225 = -19.6 \times h$
$h = \frac{225}{19.6} \approx 11.48 \, m$
अतः,प्राप्त अधिकतम ऊँचाई लगभग $11.48 \, m$ है।