(N/A) विन्यास का प्रतिधारण (Retention of configuration) का अर्थ है कि रासायनिक अभिक्रिया या रूपांतरण के दौरान कायरल केंद्र (chiral center) के चारों ओर बंधों की त्रिविम व्यवस्था (spatial arrangement) बनी रहती है।
यदि अभिक्रिया के दौरान कायरल केंद्र से जुड़े बंध नहीं टूटते हैं,तो उत्पाद में कायरल केंद्र के चारों ओर समूहों की त्रिविम व्यवस्था अभिकारक के समान ही रहती है,और अभिक्रिया को विन्यास के प्रतिधारण के साथ संपन्न माना जाता है।
$(i)$ ऐसी अभिक्रियाओं में अभिकारक और उत्पाद दोनों में कायरल कार्बन होता है और विन्यास अपरिवर्तित रहता है।
(ii) चूंकि कायरल कार्बन से जुड़े चार बंधों में से कोई भी नहीं टूटता है,इसलिए उत्पाद में कायरल केंद्र के चारों ओर की त्रिविम व्यवस्था अभिकारक के समान ही होती है।
(iii) उदाहरण: $(-)-2-\text{मिथाइलब्यूटेन}-1-\text{ऑल}$ की $HCl$ के साथ अभिक्रिया से $(+)-1-\text{क्लोरो}-2-\text{मिथाइलब्यूटेन}$ का बनना।
नोट: इस उदाहरण में कायरल केंद्र पर विन्यास सुरक्षित रहता है। कायरल कार्बन से जुड़े चार समूह $-H$,$-CH_3$,$-CH_2CH_3$ और $-CH_2OH$ (या $-CH_2Cl$) हैं। यद्यपि विन्यास बना रहता है,लेकिन $-CH_2OH$ के $-CH_2Cl$ में बदलने के कारण समूहों की प्राथमिकता बदल जाती है,जिसके परिणामस्वरूप प्रकाशीय घूर्णन का चिह्न $(-)$ से $(+)$ में बदल जाता है।