(A) पेपरड मॉथ $(Biston \text{ } betularia)$ की आबादी में दो प्रकार मौजूद थे: हल्के रंग के (ग्रे) और गहरे रंग के (मेलानिक/काले)।
औद्योगीकरण से पहले $(1850)$, हल्के रंग के मॉथ अधिक प्रचलित थे क्योंकि वे लाइकेन से ढके पेड़ों के तनों के साथ अच्छी तरह से घुल-मिल जाते थे, जो शिकारियों के खिलाफ प्रभावी छलावरण (camouflage) प्रदान करता था।
गहरे रंग के मॉथ आसानी से दिखाई दे जाते थे और शिकारियों द्वारा खा लिए जाते थे, इसलिए उनकी संख्या बहुत कम थी।
औद्योगीकरण $(1920)$ के साथ, पेड़ों के तने काले धुएं (soot) से ढंक गए, जिससे लाइकेन नष्ट हो गए। इसने गहरे रंग के मॉथ को बेहतर छलावरण प्रदान किया, जिससे उनकी आबादी में वृद्धि हुई।
यदि उद्योगों को हटा दिया गया होता, तो पर्यावरण धीरे-धीरे अपनी पूर्व-औद्योगिक स्थिति में वापस आ जाता (लाइकेन फिर से उग आते)। परिणामस्वरूप, गहरे रंग के मॉथ ने अपना छलावरण लाभ खो दिया होता, वे शिकारियों को अधिक स्पष्ट दिखाई देते और उनकी आबादी कम हो जाती, जबकि हल्के रंग के मॉथ ने अपना चयनात्मक लाभ फिर से प्राप्त कर लिया होता।