(N/A) फिनोल से एस्पिरिन का रूपांतरण दो मुख्य चरणों में होता है:
$1$. फिनोल का सैलिसिलिक एसिड में रूपांतरण (कोल्बे अभिक्रिया):
फिनोल की अभिक्रिया $NaOH$ के साथ कराने पर सोडियम फेनॉक्साइड प्राप्त होता है। इसके बाद इसकी अभिक्रिया $400 \ K$ ताप और $4-7 \ atm$ दाब पर $CO_2$ के साथ कराई जाती है,और अंत में $H^+$ द्वारा अम्लीकरण करने पर सैलिसिलिक एसिड प्राप्त होता है।
$2$. सैलिसिलिक एसिड का एसिटिलीकरण:
सैलिसिलिक एसिड की अभिक्रिया एसिटिक एनहाइड्राइड $(CH_3CO)_2O$ के साथ अम्ल उत्प्रेरक $(H^+)$ की उपस्थिति में कराई जाती है। इस प्रक्रिया को एसिटिलीकरण कहते हैं,जिसमें फेनोलिक हाइड्रोजन को एसिटाइल समूह द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है,जिससे एस्पिरिन ($2$-एसेटोक्सीबेंजोइक एसिड) और एसिटिक एसिड $(CH_3COOH)$ प्राप्त होता है।