(N/A) अल्कोहल ($C_{n}H_{2n+1}OH$,जहाँ $n \geq 2$) उच्च तापमान पर $H_{2}SO_{4}$ या $H_{3}PO_{4}$ जैसे सांद्र खनिज अम्लों के साथ अभिक्रिया करके निर्जलीकरण करते हैं,जिससे एल्कीन का निर्माण होता है।
अभिक्रिया की क्रियाविधि:
इस अभिक्रिया में,$\alpha$-कार्बन से $-OH$ समूह और $\beta$-कार्बन से एक हाइड्रोजन परमाणु जल के अणु $(H_{2}O)$ के रूप में निकल जाते हैं। इससे $\alpha$ और $\beta$-कार्बन के बीच एक $\pi$-बंध बनता है। चूँकि इस प्रक्रिया में जल का अणु बाहर निकलता है,इसलिए इसे अम्लीय निर्जलीकरण कहा जाता है। इसे $\beta$-विलोपन अभिक्रिया के रूप में भी जाना जाता है।
सामान्य अभिक्रिया:
$CH_{3}-CH_{2}-OH \xrightarrow[\Delta, 443 \ K]{\text{सांद्र} \ H_{2}SO_{4} \ / \ H_{3}PO_{4}} CH_{2}=CH_{2} + H_{2}O$