(N/A) संधारित्रों के संयोजन की आवश्यकता तब होती है जब हमें धारिता (capacitance) का एक विशिष्ट मान प्राप्त करना होता है जो हमारे पास उपलब्ध एकल संधारित्र में नहीं होता है। संधारित्रों को संयोजित करके,हम वांछित तुल्य धारिता प्राप्त कर सकते हैं।
संधारित्रों को जोड़ने के दो मुख्य तरीके हैं:
$(1)$ श्रेणी क्रम संयोजन: इस व्यवस्था में,संधारित्र एक-दूसरे के साथ श्रेणी में जुड़े होते हैं। तुल्य धारिता $C_{eq}$ का सूत्र $\frac{1}{C_{eq}} = \frac{1}{C_1} + \frac{1}{C_2} + \dots + \frac{1}{C_n}$ है। इस संयोजन का उपयोग कुल धारिता को कम करने के लिए किया जाता है।
$(2)$ समांतर क्रम संयोजन: इस व्यवस्था में,सभी संधारित्र समान विभवांतर के बीच जुड़े होते हैं। तुल्य धारिता $C_{eq}$ का सूत्र $C_{eq} = C_1 + C_2 + \dots + C_n$ है। इस संयोजन का उपयोग कुल धारिता को बढ़ाने के लिए किया जाता है।