(N/A) पास्कल का नियम: "किसी परिबद्ध तरल पर लगाया गया दाब का परिवर्तन तरल के प्रत्येक बिंदु पर और पात्र की दीवारों पर बिना कम हुए संचरित होता है।"
हाइड्रोलिक लिफ्ट इसी सिद्धांत पर आधारित है।
चित्र में दिखाए अनुसार, $A_{1}$ और $A_{2}$ अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल वाले दो सिलेंडर पर विचार करें, जहाँ $A_{1} < < A_{2}$ है।
इस पात्र में एक तरल भरा होता है।
छोटे अनुप्रस्थ काट $A_{1}$ वाले पिस्टन का उपयोग तरल पर सीधे बल $F_{1}$ लगाने के लिए किया जाता है। दाब $P_{1} = \frac{F_{1}}{A_{1}}$ पूरे तरल में संचरित होकर $A_{2}$ क्षेत्रफल वाले बड़े पिस्टन तक पहुँचता है।
पास्कल के नियम के अनुसार, दाब बिना कम हुए संचरित होता है, इसलिए $P_{1} = P_{2}$।
अतः, $\frac{F_{1}}{A_{1}} = \frac{F_{2}}{A_{2}}$, जिसका अर्थ है $F_{2} = F_{1} \left( \frac{A_{2}}{A_{1}} \right)$।
चूंकि $A_{2} > > A_{1}$ है, इसलिए बड़े पिस्टन पर कार्य करने वाला बल $F_{2}$ लगाए गए बल $F_{1}$ से बहुत अधिक होता है, जिससे लिफ्ट कार जैसे भारी भार को उठाने में सक्षम होती है।