इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: यह दो हाइड्रोजन परमाणुओं $(1s^1)$ के संयोजन से बनता है। $H_2$ अणु में इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या $2$ है।
$H_2$ अणु में आणविक कक्षक $\sigma_{1s}$ और $\sigma_{1s}^*$ होते हैं।
अतः,$H_2$ अणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास $(\sigma_{1s})^2 (\sigma_{1s}^*)^0$ है।
बंध क्रम: आबंधी आणविक कक्षक $(BMO)$ $\sigma_{1s}$ में इलेक्ट्रॉनों की संख्या $= 2$ और विपरीत आबंधी आणविक कक्षक $(ABMO)$ $\sigma_{1s}^*$ में इलेक्ट्रॉनों की संख्या $= 0$ है।
अतः,बंध क्रम $= \frac{N_b - N_a}{2} = \frac{2 - 0}{2} = 1$.
इसका अर्थ है कि दो $H$ परमाणु एक एकल सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़े हुए हैं।
चुंबकीय गुण: $H_2$ अणु में कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन मौजूद नहीं है और सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं। इसलिए,$H_2$ अणु प्रतिचुंबकीय (diamagnetic) है।