(N/A) डी-ब्रोग्ली सिद्धांत: फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी डी-ब्रोग्ली ने $1924$ में प्रस्तावित किया कि पदार्थ,विकिरण की तरह,द्वैत व्यवहार प्रदर्शित करता है,अर्थात कण और तरंग दोनों के गुण। इसका अर्थ है कि जिस प्रकार फोटॉन में संवेग और तरंगदैर्ध्य दोनों होते हैं,उसी प्रकार इलेक्ट्रॉनों में भी संवेग और तरंगदैर्ध्य होने चाहिए।
गणितीय संबंध: पदार्थ कण के तरंगदैर्ध्य $(\lambda)$ और संवेग $(p)$ के बीच निम्नलिखित संबंध है:
$\lambda = \frac{h}{m v} = \frac{h}{p} \quad$ (Eq. $- 2.30$)
डी-ब्रोग्ली के द्वैत व्यवहार का प्रमाण: डी-ब्रोग्ली की भविष्यवाणी प्रयोगात्मक रूप से तब सिद्ध हुई जब यह पाया गया कि इलेक्ट्रॉन पुंज विवर्तन (diffraction) प्रदर्शित करता है,जो तरंगों का एक विशिष्ट गुण है।
सीमा: डी-ब्रोग्ली के अनुसार,गति में प्रत्येक वस्तु तरंग चरित्र रखती है। सामान्य वस्तुओं से जुड़ी तरंगदैर्ध्य इतनी कम होती है (उनके बड़े द्रव्यमान के कारण) कि उनके तरंग गुणों का पता नहीं लगाया जा सकता है।
हालाँकि,इलेक्ट्रॉनों और अन्य उप-परमाणु कणों (बहुत कम द्रव्यमान वाले) से जुड़ी तरंगदैर्ध्य का प्रयोगात्मक रूप से पता लगाया जा सकता है।